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संसद में गूंजी छत्तीसगढ़ी सिनेमा की गूंज: सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रयासों से गैर-मेट्रो क्षेत्रों में खुलेंगे फिल्म कौशल विकास केंद्र

नई दिल्ली/रायपुर।  लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल की दूरदर्शी सोच के चलते छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य क्षेत्रीय फिल्म निर्माण केंद्रों के लिए विकास के नए द्वार खुलते नजर आ रहे हैं।

संसद में श्री अग्रवाल द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर सूचना और प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरूगन ने राज्य में फिल्म निर्माण की बाधाओं को दूर करने और स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त बनाने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदमों की जानकारी साझा की है।

एकल खिड़की प्रणाली से सुगम होगा फिल्मांकन

बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ जैसे उभरते फिल्म निर्माण राज्यों (श्रेणी-ग) में “एकल खिड़की” (Single Window) अनुभव को बेहतर बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके जवाब में मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिल्म सुविधा कार्यालय, जिसे अब “इंडिया सिने हब (ICH)” के रूप में जाना जाता है, छत्तीसगढ़ की राज्य-स्तरीय मंजूरी प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, “मेरा लक्ष्य छत्तीसगढ़ की नैसर्गिक सुंदरता और यहाँ की समृद्ध संस्कृति को वैश्विक पटल पर लाना है। ‘इंडिया सिने हब’ के साथ राज्य प्रणालियों का एकीकरण होने से फिल्म निर्माताओं को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे छत्तीसगढ़ एक प्रमुख फिल्मिंग डेस्टिनेशन बनेगा।”

क्षेत्रीय सिनेमा और स्थानीय प्रतिभा को प्रोत्साहन

सांसद अग्रवाल द्वारा क्षेत्रीय सर्किट में निर्माण को प्रोत्साहित करने और “सांस्कृतिक बोनस” जैसे अभिनव सुझावों पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। सरकार अब राज्यों को अपनी फिल्म नीतियों में स्थानीय भागीदारी और क्षेत्रीय सिनेमा के लिए विशेष प्रोत्साहन तंत्र शामिल करने हेतु प्रेरित कर रही है। इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और क्रू मेंबर्स के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि, छत्तीसगढ़ के फिल्म पोर्टल को राष्ट्रीय ‘इंडिया सिने हब’ के साथ जोड़कर आवेदन प्रक्रियाओं का मानकीकरण किया जा रहा है। साथ ही स्वदेश दर्शन जनजातीय सर्किट जैसे क्षेत्रों में पर्यावरण नियमों के पालन के साथ फिल्म शूटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यटन में वृद्धि होगी।

उन्होंने गैर-मेट्रो क्षेत्रों में ‘बिलो-द-लाइन’ क्रू (कैमरा असिस्टेंट, लाइटमैन, मेकअप आर्टिस्ट आदि) के लिए विशेष कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया।

बृजमोहन अग्रवाल के इन प्रयासों से न केवल छत्तीसगढ़ के फिल्म उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य की कला और संस्कृति को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। उनके निरंतर अनुश्रवण के कारण ही राज्य की फिल्म नीति और केंद्रीय फिल्म सुविधा तंत्र के बीच समन्वय स्थापित हो पा रहा है।

राजधानी रायपुर के नवा रायपुर में हाल ही में “चित्रोत्पला फ़िल्म सिटी” परियोजना का भूमि पूजन किया गया, जो छत्तीसगढ़ के विकास और पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह भव्य परियोजना पर्यटन मंडल के साथ लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 147 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि कुल मिलाकर 300 करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश भी संभावित है।

चित्रोत्पला फ़िल्म सिटी में फिल्म निर्माण के लिए अत्याधुनिक शूटिंग फ्लोर, पोस्ट-प्रोडक्शन स्टूडियो, सांस्कृतिक केंद्र, होटल और “स्नो वर्ल्ड” जैसी आकर्षक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह न केवल प्रदेश को फिल्म निर्माण का मजबूत केंद्र बनाएगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

इस परियोजना से प्रदेश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ पहले से ही फिल्म शूटिंग के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। यहां “न्यूटन”, “जहानाबाद”, “कौन प्रवीण तांबे”, “द ग्रेट इंडियन मर्डर” और “ग्राम चिकित्सालय” जैसी चर्चित फिल्मों और वेब सीरीज़ की शूटिंग हो चुकी है।

“चित्रोत्पला फ़िल्म सिटी” निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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